केतु महादशा के दौरान बुध की अंतर्दशा आने से जीवन में आध्यात्मिक विरक्ति और बौद्धिक विकास की एक अनूठी अवस्था उत्पन्न होती है। यह 11 महीने 27 दिनों की अवधि व्यक्ति को भौतिक सुखों से ऊपर उठकर ज्ञान की ओर ले जाती है। केतु, जो 'मोचक' ग्रह माना जाता है, और बुध की तीक्ष्ण बुद्धि का संयोजन मन को शुद्धि की ओर प्रेरित करता है।
केतु-बुध की महादशा का महत्व
केतु महादशा (7 साल) के इस चरण में बुध की अंतर्दशा व्यक्ति को भौतिक बंधनों से मुक्त होने में सहायक होती है। बुध की बुद्धि और केतु की रहस्यमय ऊर्जा मिलकर जीवन के उद्देश्य को नए सिरे से परिभाषित करती है। यह अवधि धार्मिक अध्ययन, योग और दर्शन में रुचि जगाने के लिए प्रसिद्ध है।
प्रभाव और संकेत
इस दौरान व्यक्ति को भौतिक संपत्ति या रिश्तों में असंतोष हो सकता है, जो आंतरिक विकास की ओर इशारा करता है। बुध की अंतर्दशा के कारण बौद्धिक चर्चाओं में रुचि बढ़ती है, परंतु संचार में अतिशय व्यावहारिकता भी दिखाई दे सकती है। केतु की प्रभावशीलता से अतीत के कर्मों का समाधान भी इस अवधि में होता है।
शांतिपूर्ण जीवन के उपाय
1. शनि-केतु संतुष्टि: शनिवार को तुलसी के पौधे को जल चढ़ाएं और केतु मंत्र 'ॐ नमः शनि कोटाय स्वाहा' का जाप करें।
2. बुद्धि विकास: प्रतिदिन 11 मिनट गणित या तर्कशास्त्र का अध्ययन करें।बुधवार को दान करने से बुध की क्रूरता श
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